कृष्णमोहन झा लेख

मुख्यमंत्री,मंत्री पद से हटते ही शासकीय आवासों को खाली करने के हो सख्त प्रावधान!

अभी एक माह पूर्व ही सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी बंगला खाली कराने के निर्देश राज्य की योगी सरकार को दिए थे। आदेश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, मायावती व अखिलेश यादव ने उन्हें आवंटित मकान खाली कर दिए। सवाल यह है कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा आदेश नही दिया होता तो क्या ये पूर्व मुख्यमंत्री अपना बंगला छोड़ने के लिए सहर्ष तैयार हो जाते! तो शायद नही। पूर्व मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव ने तो उनके बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च कर निर्माण कार्य कराया था,तब प्रश्न उठना स्वभाविक है कि आखिर इस खर्च का औचित्य क्या था। अखिलेश यादव के परिजनों व समर्थकों ने खाली करते वक्त उस बंगले में इतनी तोड़फोड़ की कि अब उसे बिना मरमत के किसी अन्य पात्र को नही दिया जा सकता। अब अखिलेश यादव की ओर से यह भी कहा गया है कि बंगले की मरम्मत का खर्च उठाने को वे तैयार है। सवाल यह उठता है कि यदि सहर्ष तैयार थे तो फिर इतनी तोड़फोड़ क्यों की गई। निश्चित ही यह तोड़फोड़ उनकी उस खीज का पतिचायक है जो सरकारी बंगले के खाली करने की विवशता से उपजी थी। कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अभी भी सरकारी बंगला खाली नही किया है। अब देखना यह है कि बंगले लौटाने को वे सहर्ष तैयार होते है या नही। और क्या योगी सरकार उन सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से सामान व्यवहार करेगी,जिनसे बंगलें खाली कराने की अपेक्षा की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने यद्यपि अपने फैसले में सिर्फ उत्तरप्रदेश सरकार को ही इस तरह का आदेश दिया था, लेकिन क्या दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी ऐसी अपेक्षा की जा सकती है। इस आदेश के बाद यदि सभी राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने स्वमेव ही शासकीय आवास खाली करने को तैयार हो जाए तो देश दुनिया मे उनकी प्रशंसा ही होगी,लेकिन अभी तक किसी ने ऐसी इच्छा व्यक्त नही की है।उत्तरप्रदेश के बाद अब मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास एक माह में खाली करने के जबलपुर हाई कोर्ट ने निर्देश दिए है।यह निर्देश एक जनहित याचिका पर दिए गए है। हाई कोर्ट ने मंत्री वेतन एवं भत्ता अधिनियम 1972 में किए गए संशोधनों को असंवैधानिक ठहराया है। कोर्ट ने  यह निर्णय उत्तरप्रदेश के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दिया है। गौरतलब है कि  पूर्व मुख्यमंत्रियों ने ही नही बल्कि कई मंत्रियों सांसदों एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों ने दो दो बंगलों पर कब्जे कर रखे है। दो पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह एवं उमा भारती ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए बंगला खाली करने की सहमति व्यक्त कर दी है,लेकिन आश्चर्यजनक रूप से पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता कैलाश जोशी ने इसके लिए अनिच्छा व्यक्त की है। उनका कहना है कि 40 साल बाद इस तरह बंगला खाली करने उचित नही है। मै मुख्यमंत्री से मिलकर सुप्रीम कोर्ट में अपील की बात करूंगा ,ताकि कोई रास्ता निकल आए सके। मतलब साफ है कि उनकी पूरी कोशिश है कि बंगला खाली न करना पड़े। मध्यप्रदेश में कई वरिष्ठ नेताओं ने अलग अलग नामो से अपने बंगले आवंटित करवा रखे है जिन पर वर्षो से उनका कब्जा बरकरार है,विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मुख्यमंत्री आवास के अतिरिक्त लिंक रोड पर एक और मकान आवंटित करवाने का आरोप लगाया जाता रहा है|मध्य प्रदेश  एवं उत्तर प्रदेश में जो स्थिति निर्मित हुई है वैसी स्थिति अन्य प्रदेशों में भी निर्मित हो सकती है,इसलिए केंद्र सरकार को इस संबंध में समान आचार संहिता सभी अतिविशिष्ट व्यक्तियों के लिए बनानी चाहिए,जिससे कि बंगला खाली करने की ऐसी स्थिति निर्मित न हो। सर्वोत्तम बात तो यह है कि मुख्यमंत्री या अन्य विशिष्ट व्यक्ति पदमुक्त होने के बाद स्वयं ही निश्चित समय सीमा में अपना सरकारी आवास खाली कर एक मिसाल पेश करे जिससे जनता में उनका नैतिक आधार मजबूत हो।